UP Election 2027: वाराणसी की की 8 सीटों पर बिछी चुनावी बिसात...
UP Assembly Election 2027: उत्तर प्रदेश में 2027 में विधानसभा चुनाव होने हैं. ऐसे में सभी पार्टियों ने इसकी तैयारियां भी शुरू कर दी हैं. राज्य की सभी सीटों पर चुनावी सरगर्मियां तेज हो गई हैं. इस चुनाव में यूपी का बनारस यानी वाराणसी जिला बेहद खास है. क्योंकि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी वाराणसी सीट से ही सांसद हैं. वह 2014 से लगातार तीन बार से इस सीट पर चुनाव जीतते रहे हैं. यह काशी की धार्मिक-सांस्कृतिक पहचान और भाजपा की राष्ट्रीय राजनीति का महत्वपूर्ण प्रतीक बन चुकी है. PM नरेंद्र मोदी वाराणसी लोकसभा सीट से 2014 से लगातार सांसद हैं. उन्होंने पहली बार 2014 में यहां से चुनाव लड़कर जीत हासिल की और इसके बाद 2019 और 2024 में भी वाराणसी से जीत दर्ज की.
काशी का आध्यात्मिक महत्व- हिंदू मान्यताओं में काशी को भगवान शिव की नगरी कहा गया है. मान्यता है कि काशी की धरती पर मृत्यु पाने वाले को मोक्ष की प्राप्ति होती है और जन्म-मृत्यु के चक्र से मुक्ति मिल जाती है. गंगा के पवित्र जल को पापों का नाश करने वाला माना जाता है. प्रसिद्ध लेखक मार्क ट्वेन ने बनारस की प्राचीनता से प्रभावित होकर कहा था- 'बनारस इतिहास, परंपरा और किंवदंतियों से भी पुराना है.'
वाराणसी की कुल जनसंख्या और जाति प्रतिशत
भौगोलिक तौर पर वाराणसी की स्थिति इसे खास बनाती है. वाराणसी की सीमाएं पांच जिलों से जुड़ती हैं- उत्तर में जौनपुर, उत्तर-पूर्व में गाजीपुर, पूर्व में चंदौली, दक्षिण में मिर्जापुर और पश्चिम में भदोही. इसके अलावा जिले में 8 ब्लॉक, 1327 गांव और 25 पुलिस स्टेशन हैं. 2011 की जनगणना के मुताबिक जिले की आबादी करीब 36.76 लाख थी. इसमें करीब 52.3 प्रतिशत पुरुष और 47.7 प्रतिशत महिलाएं थीं.
जिले की साक्षरता दर करीब 75.60 प्रतिशत है. करीब 56.6 प्रतिशत आबादी ग्रामीण है और अनुसूचित जाती करीब 13.2 प्रतिशत है. वाराणसी की आबादी में करीब 84.5 फीसदी हिंदू हैं, जबकि 14.9 फीसदी मुस्लिम आबादी है. इसके अलावा ईसाई, सिख, बौद्ध और जैन समुदायों की आबादी अपेक्षाकृत कम है. यानी वाराणसी का धार्मिक समीकरण मुख्य रूप से हिंदू और मुस्लिम आबादी के इर्द-गिर्द ही केंद्रित है.
वाराणसी में विधानसभा की कुल 8 सीटें
वाराणसी जिले की 8 विधानसभा सीटों में से 6 विधानसभा क्षेत्र वाराणसी लोकसभा (77) सीट में आते हैं, जबकि 2 विधानसभा क्षेत्र चंदौली लोकसभा (76) सीट में जाते हैं. उनमें वाराणसी लोकसभा में रोहनिया, वाराणसी उत्तर, वाराणसी दक्षिण, वाराणसी कैंट, सेवापुरी, पिंडरा शामिल हैं. जबकि चंदौली लोकसभा में अजगरा (SC), शिवपुर सीट आती हैं. वाराणसी की अंतिम SIR 2026 मतदाता सूची 10 अप्रैल 2026 को प्रकाशित हुई. इस सूची के मुताबिक, जिले की 8 विधानसभा सीटों में कुल 27,30,603 मतदाता हैं.
वाराणसी की विधानसभा और जनसंख्या
384 पिंडरा 3.33 लाख
385 अजगरा (SC) 3.44 लाख
386 शिवपुर 3.58 लाख
387 रोहनिया 3.67 लाख
388 वाराणसी उत्तर 3.65 लाख
389 वाराणसी दक्षिण 2.68 लाख
390 वाराणसी कैंट 3.78 लाख
391 सेवापुरी 3.18 लाख
वाराणसी की सभी सीटों पर पिछले तीन विधानसभा चुनाव का गणित
बता दें कि वाराणसी की विधानसभा राजनीति पिछले तीन चुनावों में लगातार बदलती रही है. वाराणसी की 8 विधानसभा सीटों के चुनावी इतिहास पर नजर डालें तो पिछले तीन चुनावों में जिले की राजनीति में BJP का लगातार मजबूत होता दबदबा साफ दिखाई देता है.
2012 में मुकाबला काफी बिखरा हुआ था. BJP ने 3 सीटें जीतीं, जबकि BSP को 2 और SP, अपना दल तथा कांग्रेस को 1-1 सीट मिली थी. यानी उस समय वाराणसी में कोई एक पार्टी पूरी तरह हावी नहीं थी.
2017 में सियासी तस्वीर पूरी तरह बदल गई. BJP ने सीधे 6 सीटों पर कब्जा जमाया. अपना दल ने 1 सीट जीती, जबकि सपा-बसपा SBSP ने भी 1 सीट हासिल की. खास बात यह रही कि BSP, SP और कांग्रेस का वाराणसी में खाता तक नहीं खुला. यह चुनाव वाराणसी में BJP के बड़े राजनीतिक विस्तार का संकेत बना.
2022 में BJP ने अपना प्रदर्शन और बेहतर किया. पार्टी ने जिले की 8 में से 7 विधानसभा सीटें जीत लीं. अपना दल ने 1 सीट बरकरार रखी, जबकि SP, BSP, कांग्रेस और SBSP एक भी सीट नहीं जीत सके.
सभी सीटों के 2022 के विधानसभा चुनाव के आंकड़े
पिंडरा
पिंडरा विधानसभा सीट का नंबर है 384 और यह एक सामान्य सीट है. यहां अनुसूचित जाति की आबादी करीब 18.7 प्रतिशत है. मुस्लिम आबादी 7 प्रतिशत से ज्यादा है और पिंडरा की सबसे बड़ी खासियत है इसका ग्रामीण स्वरूप. इस सीट पर करीब 98.2 प्रतिशत आबादी ग्रामीण है. 2022 के विधानसभा चुनाव में पिंडरा से बीजेपी के अवधेश कुमार सिंह ने जीत दर्ज की. उन्हें कुल 84,325 वोट मिले थे, यानी करीब 38.23 प्रतिशत. दूसरे नंबर पर रहे बीएसपी के बाबूलाल, जिन्हें 48,766 वोट प्राप्त हुए यानी उन्हें कुल 22.11 प्रतिशत वोट मिले. जबकि कांग्रेस के अजय को 48,248 वोट मिले जो 21.88 प्रतिशत थे. यानी 2022 में बीजेपी उम्मीदवार ने करीब 16 प्रतिशत से ज्यादा के वोट अंतर के साथ जीत हासिल की.
अजगरा (SC)
वाराणसी की अजगरा एक SC आरक्षित सीट है और यहां का सामाजिक समीकरण चुनावी नतीजों में बेहद अहम भूमिका निभाता है. सीट की आबादी में SC समुदाय की हिस्सेदारी 21 प्रतिशत से ज्यादा है. जबकि मुस्लिम मतदाताओं की हिस्सेदारी 10 प्रतिशत से ऊपर है. अजगरा की 95 प्रतिशत से ज्यादा आबादी ग्रामीण इलाकों में रहती है. इसलिए यहां चुनावी मुद्दों में खेती, रोजगार, सड़क, बिजली, आवास और सरकारी योजनाओं का असर खासा महत्वपूर्ण हो सकता है.
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2022 के चुनाव में अजगरा विधानसभा सीट पर बीजेपी के त्रिभुवन राम ने जीत दर्ज की. उन्हें मिले 1 लाख 1 हजार 88 वोट, यानी 41.25 प्रतिशत वोट मिले. वहीं सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी के सुनील सोनकर को 91 हजार 928 वोट प्राप्त हुए, यानी 37.51 प्रतिशत वोट मिले और वे दूसरे स्थान पर रहे. जबकि बहुजन समाज पार्टी के रघुनाथ चौधरी को 42 हजार 301 वोट मिले यानी 17.26 प्रतिशत वोट मिले. यानी अजगरा में मुकाबला बेहद करीबी रहा. बीजेपी ने SBSP के मुकाबले करीब 3.74 प्रतिशत वोट की बढ़त के साथ सीट अपने नाम की.
शिवपुर
शिवपुर विधानसभा क्षेत्र (386) वाराणसी जिले की 8 विधानसभा सीटों में से एक है. यह सीट 2008 के परिसीमन के बाद नए स्वरूप में अस्तित्व में आई और यहां पहली बार 2012 में विधानसभा चुनाव हुआ. वर्तमान में शिवपुर विधानसभा क्षेत्र संख्या 386 है और चंदौली लोकसभा क्षेत्र संख्या 76 का हिस्सा है. शिवपुर एक सामान्य सीट है और यहां का सामाजिक समीकरण चुनावी नतीजों में बेहद अहम भूमिका निभाता है.
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सीट की आबादी में SC समुदाय की हिस्सेदारी 15 प्रतिशत से ऊपर है. जबकि मुस्लिम मतदाताओं की हिस्सेदारी करीब 13 प्रतिशत से ज्यादा होने का अनुमान है. शिवपुर मुख तौर पर ग्रामीण विधान सभा क्षेत्र है इसलिए आसपास के क्षेत्र में खेती, ग्रामीण बाजार और कृषि आधारित गतिविधियां लंबे समय से स्थानीय अर्थव्यवस्था का आधार रही हैं. यहां चुनावी मुद्दों में रोजगार, सड़क, बिजली, आवास और सरकारी योजनाओं का असर खासा महत्वपूर्ण हो सकता है.
2022 के विधानसभा चुनाव में शिवपुर में कैसा रहा मुकाबला
2022 के विधानसभा चुनाव में भाजपा के अनिल राजभर ने 1 लाख 15 हजार 231 वोट, यानी 45.76 फीसदी वोट हासिल कर जीत दर्ज की. वहीं SBSP के अरविंद राजभर को 87 हजार 544 वोट, यानी 34.77 फीसदी वोट मिले. तीसरे स्थान पर रहे BSP के रवि मौर्य, जिन्हें 40 हजार 601 वोट, यानी 16.12 फीसदी वोट प्राप्त हुए. यानी अनिल राजभर ने अपने निकटतम प्रतिद्वंद्वी अरविंद राजभर को 27,687 वोटों के अंतर से हराया.
शिवपुर की राजनीति का सबसे बड़ा संकेत यही है कि राजभर वोट यहां बेहद महत्वपूर्ण है. 2022 में अनिल राजभर और अरविंद राजभर के बीच सीधी टक्कर ने इस सामाजिक समीकरण को चुनाव के केंद्र में ला दिया था. इसके अलावा बड़ी ग्रामीण आबादी, SC और मुस्लिम मतदाताओं का प्रभाव मुकाबले को बहुकोणीय बनाने की क्षमता रखता है. 2017 में भाजपा के अनिल राजभर की जीत के बाद 2022 में भी भाजपा ने शिवपुर पर अपना कब्जा बरकरार रखा. अब सवाल यह है कि 2027 में भाजपा अपनी इस मजबूत पकड़ को कायम रख पाएगी या विपक्ष सामाजिक समीकरणों को नए सिरे से साधकर शिवपुर की तस्वीर बदल पाएगा?
रोहनिया
रोहनिया का इलाका वाराणसी को प्रयागराज और मिर्जापुर की दिशा से जोड़ने वाले पुराने मार्गों के बीच स्थित रहा है. वाराणसी की रोहनिया विधानसभा सीट, नंबर 387, सामान्य वर्ग की सीट है. यह मुख्य रूप से ग्रामीण क्षेत्र वाली विधानसभा है, जहां 70 फीसदी से ज्यादा आबादी ग्रामीण है. वहीं SC आबादी 13 फीसदी से ज्यादा और मुस्लिम आबादी 8 फीसदी से ज्यादा है. यानी रोहनिया का चुनावी गणित मुख्य रूप से ग्रामीण वोटरों के साथ पिछड़े, दलित और मुस्लिम मतदाताओं के समीकरण पर टिका है.
2022 के विधानसभा चुनाव में कैसा रहा इस सीट पर मुकाबल
2022 के चुनाव में अपना दल (सोनेलाल) के डॉ. सुनील पटेल ने शानदार प्रदर्शन करते हुए 1,18,663 वोट, यानी 48.08 फीसदी वोट हासिल किए. उनके मुकाबले अपना दल (कमेरावादी) के अभय पटेल को 72,191 वोट, यानी 29.25 फीसदी वोट मिले. वहीं बसपा के अरुण सिंह पटेल को 26,356 वोट, यानी 10.68 फीसदी वोट मिले. इस तरह डॉ. सुनील पटेल ने अपने निकटतम प्रतिद्वंद्वी अभय पटेल को 46,472 वोटों के बड़े अंतर से हराया.
2022 के आंकड़े साफ संकेत देते हैं कि रोहनिया में मुकाबला केवल पार्टी बनाम पार्टी नहीं, बल्कि सामाजिक समीकरणों और गठबंधन की राजनीति का भी मुकाबला है. 2027 में सबसे बड़ा सवाल यही होगा कि क्या अपना दल (सोनेलाल) अपना मजबूत आधार बरकरार रख पाएगा, या विपक्ष पटेल वोट और ग्रामीण मतदाताओं के बीच सेंध लगाकर इस सीट का समीकरण बदल पाएगा?
सेवापुरी
2012 में अस्तित्व में आई इस विधानसभा सीट को पहले गंगापुर के नाम से जाना जाता था. वाराणसी की सेवापुरी विधानसभा सीट, नंबर 391, सामान्य वर्ग की सीट है और इसका सबसे बड़ा राजनीतिक चरित्र है पूरी तरह ग्रामीण वोटरों का प्रभाव. यहां 90 फीसदी से ज्यादा आबादी ग्रामीण है, जबकि शहरी आबादी 10 फीसदी से भी कम है. इसके साथ SC आबादी 15 फीसदी से ज्यादा और मुस्लिम आबादी 5 फीसदी से अधिक है. इसलिए सेवापुरी का चुनावी गणित मुख्य रूप से ग्रामीण पिछड़े वर्ग, दलित और अन्य सामाजिक समूहों के बीच बनने वाले गठजोड़ पर निर्भर करता है.
2022 के विधानसभा चुनाव में कैसा रहा रोहनिया में मुकाबला
2022 के विधानसभा चुनाव में भाजपा के नील रतन सिंह ने मजबूत प्रदर्शन करते हुए 1,05,163 वोट, यानी 47.60 फीसदी वोट हासिल कर चुनाव जीते. जबकि उनके सामने समाजवादी पार्टी के सुरेंद्र सिंह पटेल ने 82,632 वोट, यानी 37.41 फीसदी वोट ही हासिल कर पाए. वहीं बसपा के अरविंद कुमार त्रिपाठी को 24,065 वोट, यानी 10.89 फीसदी वोट मिले. भाजपा और सपा के बीच अंतर 22,531 वोट रहा. यानी करीब 10.19 प्रतिशत वोट का अंतर जो बताता है कि मुकाबला एकतरफा नहीं था, लेकिन भाजपा उम्मीदवार ने स्पष्ट बढ़त बनाई.
वाराणसी- नॉर्थ, साउथ और कैंट
जैसे-जैसे वाराणसी शहर का विस्तार हुआ और मतदाताओं की संख्या बढ़ी, पूरे शहरी क्षेत्र को एक ही विधानसभा क्षेत्र में रखना व्यावहारिक नहीं रहा. इसलिए चुनावी प्रतिनिधित्व को बेहतर बनाने के लिए शहर को अलग-अलग विधानसभा क्षेत्रों में बांटा गया.
1. वाराणसी दक्षिण- यह वाराणसी का सबसे पुराना और ऐतिहासिक शहरी राजनीतिक क्षेत्र है. इसमें काशी का पुराना शहर, प्रमुख बाजार और कई ऐतिहासिक धार्मिक क्षेत्र आते हैं.
2. वाराणसी उत्तर- शहर के उत्तरी और तेजी से विकसित होते हिस्सों को प्रतिनिधित्व देने के लिए वाराणसी उत्तर विधानसभा क्षेत्र बनाया गया. इसमें पुराने शहर के साथ-साथ शहर के विस्तार वाले इलाके भी शामिल होते गए.
3. वाराणसी कैंट- कैंटोनमेंट और उसके आसपास के विकसित शहरी क्षेत्र को अलग राजनीतिक प्रतिनिधित्व देने के लिए कैंट विधानसभा क्षेत्र महत्वपूर्ण बना. इसका स्वरूप अन्य दो शहरी सीटों से कुछ अलग है क्योंकि यहां सैन्य क्षेत्र, पुराने छावनी क्षेत्र और उनसे जुड़े नागरिक इलाके हैं.
अब समझते हैं वाराणसी विधानसभा क्षेत्र के अहम आंकड़े
वाराणसी उत्तर, वाराणसी दक्षिण और वाराणसी कैंट— तीनों विधानसभा सीटें वाराणसी की शहरी राजनीति की तस्वीर पेश करती हैं. तीनों ही सामान्य सीटें हैं और इनकी सबसे बड़ी समानता यह है कि 95 फीसदी से ज्यादा आबादी शहरी है. लेकिन सामाजिक समीकरणों और चुनावी व्यवहार में तीनों सीटों के बीच काफी अंतर दिखाई देता है.
वाराणसी उत्तर- इस सीट पर मुस्लिम आबादी 15 फीसदी से ज्यादा और SC आबादी 8 फीसदी से ज्यादा है. इस सीट पर 2022 में भाजपा के रविंद्र जायसवाल 1,34,471 वोट यानी 54.61 फीसदी मत हासिल कर जीत दर्ज की. जबकि समाजवादी पार्टी के अशफाक को 93,695 वोट यानी 38.05 फीसदी मिले. दोनों के बीच अंतर 40,776 वोट का रहा.
वाराणसी दक्षिण- इस सीट पर सामाजिक समीकरण और भी दिलचस्प है. यहां मुस्लिम आबादी 16 फीसदी से ज्यादा है. 2022 में भाजपा के डॉ. नीलकंठ तिवारी को 99,622 वोट यानी 50.88 फीसदी वोट मिले, जबकि सपा के अशफाक को 88,900 वोट यानी 45.41 फीसदी वोट हासिल हुए. यहां भाजपा और सपा के बीच अंतर सिर्फ 10,722 वोट रहा. इसलिए तीनों सीटों में वाराणसी दक्षिण सबसे करीबी मुकाबले वाली सीट रही. यह सीट पुरानी काशी, धार्मिक-व्यावसायिक क्षेत्र और घनी आबादी वाले इलाकों के कारण राजनीतिक रूप से विशेष महत्व रखती है.
वाराणसी कैंट- ये सीट वाराणसी की तीनों सीटों में भाजपा के लिए सबसे मजबूत सीट के रूप में सामने आई. यहां मुस्लिम आबादी 5 फीसदी से ज्यादा है, जबकि शहरी आबादी 95 फीसदी से अधिक है. 2022 में भाजपा के सौरभ श्रीवास्तव ने 1,47,833 वोट, यानी 60.63 फीसदी वोट हासिल किए. जबकि सपा के अशफाक को 60,989 वोट यानी 25.01 फीसदी वोट मिले. इस सीट पर भाजपा की जीत का अंतर 86,844 रहा. जो इन तीनों सीटों में सबसे बड़ा अंतर है.
अगर तीनों सीटों को एक साथ देखें तो तस्वीर काफी स्पष्ट है. भाजपा ने 2022 में तीनों शहरी सीटों पर जीत दर्ज की, लेकिन उसकी पकड़ समान नहीं रही. कैंट भाजपा का सबसे मजबूत गढ़ दिखाई देता है, उत्तर में भाजपा को स्पष्ट बढ़त मिली, जबकि दक्षिण में मुकाबला सबसे ज्यादा कड़ा रहा.