UP Election 2027 से पहले Mayawati ने 17 को BSP से बाहर निकाला, LIST में कौन-कौन? कितना बदलेगा वोट बैंक?
Published: Thursday, August 13, 2026, 20:03 [IST]
UP Election 2027 Mayawati Action: उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव 2027 में अभी समय है, लेकिन राजनीतिक दलों ने अपनी-अपनी बिसात बिछानी शुरू कर दी है। 403 विधानसभा सीटों वाले यूपी में सत्तारूढ़ बीजेपी जहां सत्ता में वापसी की रणनीति पर काम कर रही है, वहीं समाजवादी पार्टी भी अपनी स्थिति मजबूत करने में जुटी है। इस बीच बहुजन समाज पार्टी (BSP) में आउटगोइंग तेजी से जारी है। मायावती कब किसको तिनके की तरह बाहर का रास्ता दिखा दें, पार्टी में इसको लेकर खलबली मची हुई है।
BSP प्रमुख मायावती ने जनवरी से 13 अगस्त 2026 तक अलग-अलग मामलों में 17 नेताओं को पार्टी से निष्कासित किए जाने की कार्रवाई की है। इनमें मंडल प्रभारी और विधानसभा स्तर के पदाधिकारियों से लेकर पूर्व लोकसभा प्रत्याशी, पूर्व विधायक, पूर्व MLC, राष्ट्रीय समन्वयक और पूर्व मंत्री तक शामिल हैं। खास बात यह है कि ज्यादातर पर पार्टी विरोधी गतिविधियों में लीन और अनुशासनहीनता का ही आरोप लगा है। हालांकि, एक जरूरी बात यह है कि इनमें कुछ ऐसे दिग्गज भी हैं, जिनकी पार्टी में री-एंट्री भी हुई है। पार्टी से निष्कासित नेताओं की कड़ी में 13 अगस्त को एक और नाम जुड़ा ' अंटू मिश्रा' का। आइए आपको रूबरू कराते हैं कि आखिर कौन-कौन पार्टी से निकाला गया?
1. अनिल कुमार: जनवरी 2026 में पहला चर्चित मामला
सहारनपुर में BSP के मंडल प्रभारी अनिल कुमार को जनवरी में पार्टी से बाहर किया गया। रिपोर्ट के मुताबिक, मायावती के जन्मदिन पर आयोजित कार्यक्रम में महिलाओं के सामने उनके कथित अभद्र भाषा के इस्तेमाल का वीडियो वायरल हुआ था। इसके बाद पार्टी ने कार्रवाई की।
2. विक्रम सिंह जाटव: जाटव आधार से जुड़े नेता
मार्च में आगरा मंडल के पूर्व जोन प्रभारी विक्रम सिंह जाटव को BSP ने निष्कासित किया। जिला अध्यक्ष के मुताबिक, उन्हें पार्टी विरोधी गतिविधियों और अनुशासनहीनता को लेकर पहले भी चेतावनी दी गई थी। विक्रम पर आरोप लगे कि अंधेरे में रखते मायावती को 22 जनवरी को दो अपराधियों से मुलाकात कराई गई और पार्टी की सदस्यता भी दिला दी। हालांकि, मई 2026 में उनकी बसपा में वापसी की रिपोर्ट भी सामने आई और उन्हें फिर संगठन में जिम्मेदारी दिए जाने की जानकारी मिली। इसलिए उन्हें वर्तमान में पार्टी से बाहर नेताओं की सूची में रखना उचित नहीं होगा। आपको बता दें कि, विक्रम सिंह जाटव को दलित समुदाय से जोड़ा जाता है। वह आगरा मंडल में BSP के संगठन से जुड़े महत्वपूर्ण पदाधिकारी रहे हैं। जाटव समुदाय BSP का पारंपरिक और सबसे महत्वपूर्ण सामाजिक आधार माना जाता है। पश्चिमी और मध्य उत्तर प्रदेश के कई हिस्सों में जाटव मतदाता BSP के मूल वोटर रहे हैं।
3. उपकार बावरा
मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, मुजफ्फरनगर के युवा नेता उपकार बावरा को भी 2026 में BSP से निष्कासित किया गया। उपलब्ध रिपोर्टों में कार्रवाई की वजह पार्टी विरोधी गतिविधियां बताई गई है। उनके निष्कासन के बाद उन्होंने खुद भी मीडिया के सामने अपनी स्थिति रखी थी। उपकार बावरा ने दावा किया कि उन्हें इस कार्रवाई की कोई आधिकारिक अग्रिम सूचना नहीं मिली और उन्होंने इसकी जानकारी मीडिया के माध्यम से प्राप्त की।
2. हाजी सरफराज राईन: मुस्लिम समीकरण का चेहरा
हाजी सरफराज राईन, जो सहारनपुर मंडल जोन प्रभारी थे, को अप्रैल में पार्टी से निकाला गया। BSP की ओर से अनुशासनहीनता और पार्टी विरोधी गतिविधियों का आरोप लगाया गया। दिलचस्प बात यह है कि बाद में सरफराज राईन की BSP में वापसी की खबर भी आई। यानी उनका मामला भी निष्कासन के बाद वापसी वाला है। आपको बता दें कि, हाजी सरफराज राईन सहारनपुर मंडल के प्रमुख BSP नेताओं में रहे हैं। उनकी पहचान मुस्लिम नेता के तौर पर काफी मजबूत शख्सियत है। सहारनपुर पश्चिमी यूपी का ऐसा क्षेत्र है, जहां मुस्लिम आबादी का चुनावी प्रभाव काफी महत्वपूर्ण है। इसलिए उनका महत्व सिर्फ संगठनात्मक पद तक सीमित नहीं था। BSP अगर 2027 में दलित-मुस्लिम समीकरण को मजबूत करने की कोशिश करती है, तो पश्चिमी यूपी में ऐसे स्थानीय चेहरों की भूमिका अहम हो सकती है।
5. जयप्रकाश सिंह और धर्मवीर सिंह अशोक
अप्रैल में BSP के दो वरिष्ठ नेताओं पर कार्रवाई ने खासा ध्यान खींचा। जयप्रकाश सिंह और धर्मवीर सिंह अशोक को पार्टी विरोधी गतिविधियों के आरोप में निकाला गया। मायावती ने खुद सोशल मीडिया पर इन दोनों के निष्कासन की पुष्टि की थी। हालांकि, जयप्रकाश सिंह का मामला भी नया नहीं था। उन्हें पहले भी BSP से निकाला गया था और बाद में पार्टी में वापस लाया गया था। लेकिन, अभी तक वापसी की कोई खबर सामने नहीं आई है।
6. जगपाल सिंह और अनिल कुमार पप्पू
सहारनपुर में कार्रवाई का सिलसिला अप्रैल में और तेज हुआ। पूर्व जिलाध्यक्ष जगपाल सिंह और पूर्व जिला प्रभारी अनिल कुमार पप्पू को पार्टी विरोधी गतिविधियों के आरोप में निष्कासित किया गया। दोनों को पहले चेतावनी दिए जाने की बात भी सामने आई।
7. सतवीर सिंह नागर: गुर्जर वोट का बड़ा नाम
जून में गौतमबुद्ध नगर से BSP के पूर्व लोकसभा प्रत्याशी सतवीर सिंह नागर को पार्टी से निकाल दिया गया। पार्टी नेतृत्व ने आरोप लगाया कि वह लंबे समय से पार्टी विरोधी गतिविधियों में शामिल थे और संगठन के निर्देशों की अनदेखी कर रहे थे। आपको बता दें कि, 17 नेताओं में जातीय समीकरण के लिहाज से सतवीर सिंह नागर सबसे महत्वपूर्ण नामों में हैं। उनकी पहचान गुर्जर नेता के तौर पर होती है। वह गौतमबुद्ध नगर से BSP के लोकसभा प्रत्याशी रह चुके हैं और दादरी से विधायक भी रहे हैं।
2019 में SP-BSP गठबंधन के उम्मीदवार के रूप में उनकी उम्मीदवारी के दौरान गौतमबुद्ध नगर में करीब 6.5 लाख गुर्जर मतदाताओं का अनुमान दिया था और बताया था कि गुर्जर इस सीट का सबसे बड़ा सामाजिक समूह था। यही वजह है कि सतवीर सिंह नागर का राजनीतिक महत्व उनके व्यक्तिगत वोट से ज्यादा गुर्जर सामाजिक नेटवर्क के कारण समझा जाता है। पश्चिमी यूपी में गुर्जर समुदाय का प्रभाव गौतमबुद्ध नगर के अलावा गाजियाबाद, मेरठ, बागपत, सहारनपुर, शामली और बिजनौर तक माना जाता है। 2026 की एक रिपोर्ट के अनुसार पश्चिमी यूपी में गुर्जर आबादी करीब 7-10% मानी जाती है और तीन दर्जन से ज्यादा विधानसभा सीटों पर उसका चुनावी असर है।
8. सहारनपुर के तीन और नेता पार्टी से बाहर
जून की शुरुआत में सहारनपुर BSP ने एक साथ तीन नेताओं पर कार्रवाई की। मंडल जोन प्रभारी राजेश कुमार प्रधान, बेहट विधानसभा अध्यक्ष वेदप्रकाश, रामपुर मनिहारान विधानसभा प्रभारी नफे सिंह को पार्टी से निष्कासित कर दिया। जिलाध्यक्ष रजनीश बंधु के मुताबिक, तीनों को पहले कई बार चेतावनी दी गई थी, लेकिन उनकी कार्यशैली में सुधार नहीं हुआ। इसके बाद पार्टी हित में उन्हें निष्कासित कर दिया गया। उस रिपोर्ट में यह भी कहा गया था कि एक महीने के भीतर सहारनपुर में आधा दर्जन से ज्यादा नेताओं को पार्टी से निकाला जा चुका था, जिससे अंदाजा लगाया जा सकता है कि स्थानीय स्तर पर संगठनात्मक अनुशासन को लेकर BSP ने कितनी सख्ती की।
9. बलदेव प्रसाद वर्मा
जुलाई की शुरुआत में बांदा BSP ने चित्रकूट मंडल के पूर्व जोन इंचार्ज बलदेव प्रसाद वर्मा को निष्कासित किया। पार्टी के मुताबिक, उन्हें पार्टी विरोधी गतिविधियों और अनुशासनहीनता को लेकर कई बार चेतावनी दी गई थी।
10. सतीश सागर
24 जुलाई के आसपास बुलंदशहर में पूर्व BSP जिलाध्यक्ष सतीश सागर के निष्कासन की स्थानीय रिपोर्ट सामने आई। उपलब्ध रिपोर्टिंग में उन्हें पार्टी से बाहर किए जाने की जानकारी दी गई है। बताया गया कि उन पर पार्टी विरोधी गतिविधियों और अनुशासनहीनता के आरोप लगाए गए हैं। पार्टी ने कई बार चेतावनी भी जारी की थी।
11. अशोक सिद्धार्थ और रणधीर सिंह बेनीवाल: अगस्त का बड़ा एक्शन
2 अगस्त 2026 को मायावती ने दो बड़े राष्ट्रीय नेताओं पर कार्रवाई की। डॉ. अशोक सिद्धार्थ, पूर्व राज्यसभा सांसद और BSP के राष्ट्रीय समन्वयक रणधीर सिंह बेनीवाल, राष्ट्रीय समन्वयक को अनुशासनहीनता और पार्टी विरोधी गतिविधियों के आरोप में बाहर किया गया। अशोक सिद्धार्थ का मामला विशेष रूप से महत्वपूर्ण है, क्योंकि वह आकाश आनंद के ससुर हैं। अशोक सिद्धार्थ को इससे पहले भी BSP से निकाला गया था, लेकिन सितंबर 2025 में माफी के बाद उनकी वापसी हो गई थी। 2026 में मायावती ने उन्हें दोबारा महत्वपूर्ण संगठनात्मक जिम्मेदारियां भी दी थीं। अगस्त का निष्कासन इसलिए उनके लिए दूसरी बड़ी कार्रवाई है।
12. अनंत कुमार मिश्रा उर्फ अंटू मिश्रा
13 अगस्त 2026 को BSP ने पूर्व स्वास्थ्य मंत्री अनंत कुमार मिश्रा उर्फ अंटू मिश्रा को पार्टी से निकाल दिया। वह मायावती सरकार में स्वास्थ्य मंत्री रह चुके हैं। रिपोर्ट के मुताबिक, पार्टी ने संगठनात्मक अनुशासन और आंतरिक नीतियों से जुड़े कारणों के आधार पर कार्रवाई की।
क्या 2027 से पहले BSP में हो रही है 'छंटाई'? मायावती के एक्शन का सियासी संदेश क्या?
2027 के विधानसभा चुनाव से पहले BSP के सामने सबसे बड़ी चुनौती अपनी खोई हुई राजनीतिक जमीन वापस हासिल करना है। ऐसे में पार्टी नेतृत्व संगठन के भीतर ऐसे नेताओं पर नियंत्रण मजबूत करना चाहता है जिन्हें पार्टी की लाइन से अलग गतिविधियों में शामिल माना जा रहा है।
सहारनपुर में एक के बाद एक कार्रवाई, गौतमबुद्ध नगर में पूर्व लोकसभा प्रत्याशी पर एक्शन और फिर राष्ट्रीय स्तर के नेताओं अशोक सिद्धार्थ व रणधीर सिंह बेनीवाल और पूर्व मंत्री अंटू मिश्रा को बाहर करना बताता है कि BSP में संगठनात्मक अनुशासन को लेकर मायावती समझौते के मूड में नहीं हैं। हालांकि इसे सिर्फ 'पार्टी से सफाया' कहना पूरी तस्वीर नहीं होगी। BSP एक तरफ निष्कासन कर रही है, तो दूसरी तरफ कुछ पुराने नेताओं को वापस भी ला रही है। इसलिए इसे 2027 से पहले संगठन को अपने नियंत्रण में मजबूत करने और चुनावी तैयारी के लिए रीसेट के तौर पर देखना ज्यादा सटीक होगा।