UP Excise Export Surge: आबकारी निर्यात नीति से यूपी बना एक्सपोर्ट इंजन; खेत से विदेशी बाजार तक जुड़ी आर्थिक चेन - Haribhoomi

उत्तर प्रदेश की योगी सरकार की नई त्रिवर्षीय आबकारी निर्यात नीति 2026-29 का सकारात्मक असर प्रदेश की पूरी एक्सपोर्ट चेन पर दिखाई दे रहा है। खेतों में तैयार होने वाले गन्ने और अनाज से लेकर फैक्ट्री, बोतल, पैकेजिंग और परिवहन तक आर्थिक गतिविधियों को जबरदस्त रफ्तार मिली है।

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मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ

  • Published: 22 Sep 2026, 07:47 AM IST
  • Last Updated: 22 Sep 2026, 07:47 AM IST

लखनऊ में आबकारी विभाग द्वारा जारी आंकड़ों के अनुसार, उत्तर प्रदेश अब देश का प्रमुख एक्सपोर्ट इंजन बनकर उभर रहा है। राज्य सरकार की नई आबकारी निर्यात नीति से न केवल नई औद्योगिक इकाइयों की स्थापना को बढ़ावा मिला है, बल्कि कृषि आधारित उत्पादों को भी वैश्विक बाजार में नई पहचान मिल रही है। इस नीति के तहत खेत से लेकर फैक्ट्री और फिर विदेशी बाजार तक एक मजबूत आपूर्ति श्रृंखला तैयार हो चुकी है।

​राष्ट्रीय निर्यात में यूपी की हिस्सेदारी 12.6 प्रतिशत हुई

​अप्रैल-जून 2026 की पहली तिमाही के दौरान देश से कुल 10.17 करोड़ अमेरिकी डॉलर का आबकारी निर्यात हुआ। इसमें उत्तर प्रदेश की हिस्सेदारी 127.8 लाख डॉलर रही, जो पिछले वर्ष की समान अवधि (87.9 लाख डॉलर) की तुलना में लगभग 39.9 लाख डॉलर अधिक है।

इसके साथ ही देश के कुल आबकारी निर्यात में यूपी की हिस्सेदारी 10.2 प्रतिशत से बढ़कर 12.6 प्रतिशत हो गई है। निर्यात के मामले में यूपी अब महाराष्ट्र और पंजाब के बाद देश में तीसरे स्थान पर पहुंच गया है।

​नई औद्योगिक इकाइयों और बंद प्लांट को मिला संबल

​निर्यात की बढ़ती संभावनाओं को देखते हुए राज्य में नए निवेश और औद्योगिक गतिविधियों में तेजी आई है:

  • ​उन्नाव और हरदोई: यूनाइटेड ब्रुअरीज और माउंट एवरेस्ट ब्रुअरीज अपनी नई इकाइयां स्थापित कर रही हैं।
  • ​फर्रुखाबाद: वुडपेकर ग्रीनएग्री न्यूट्रिएंट्स ने नया प्लांट लगाया है।
  • ​मुरादाबाद: एलाइड ब्लेंडर्स एंड डिस्टिलर्स ने लंबे समय से बंद पड़ी अपनी इकाई को दोबारा चालू किया है।
  • ​गोरखपुर और सीतापुर: कियान डिस्टिलरी ने पे-आसवनी व ब्रुअरी के लिए आवेदन किया है, जबकि रैडिको खेतान अपने अन्य राज्यों के निर्यात उत्पादन को सीतापुर और रामपुर स्थानांतरित कर रही है।

​वैश्विक बाजार में बजा बस्ती के शीरे का डंका

​प्रदेश के आबकारी मंत्री नितिन अग्रवाल ने बताया कि कृषि आधारित उत्पाद एक्सपोर्ट चेन में अहम भूमिका निभा रहे हैं। अकेले बस्ती जिले से 25 हजार कुंतल शीरे का विदेश में निर्यात किया गया, जिससे राज्य को लगभग 5 लाख अमेरिकी डॉलर (करीब 4.15 करोड़ रुपये) की विदेशी मुद्रा प्राप्त हुई। यह साबित करता है कि प्रदेश के कृषि उत्पाद अब सीधे अंतरराष्ट्रीय बाजारों तक पहुंच रहे हैं।

​कांच की बोतलों और पैकेजिंग उद्योग में बड़ा उछाल

​आबकारी आयुक्त डॉ. आदर्श सिंह के अनुसार, अप्रैल-जुलाई 2026 के बीच यूपी की इकाइयों ने अन्य राज्यों को पिछले वर्ष के मुकाबले 1.64 करोड़ अधिक बोतलें सप्लाई की हैं, जो कि 45.7 प्रतिशत की बढ़ोतरी है। आबकारी निर्यात का सीधा फायदा गन्ना किसानों से लेकर कांच की बोतल, ढक्कन, लेबलिंग, कार्टन पैकेजिंग, ट्रांसपोर्टेशन और वेयरहाउसिंग से जुड़े लाखों लोगों को मिल रहा है।