UPI यूजर्स के लिए बड़ी राहत: सरकार ने कहा - नहीं लगेगा कोई चार्ज, व्यापारियों को भी मिलेगी छूट - Haribhoomi

सरकार ने साफ किया कि यूपीआई लेनदेन पर आम उपभोक्ताओं और छोटे व्यापारियों से कोई अतिरिक्त शुल्क नहीं वसूला जाएगा, ज्यादातर व्यापारी लेनदेन रहेंगे मुफ्त।

UPI charges news

सरकार ने साफ किया कि यूपीआई लेनदेन पर आम उपभोक्ताओं और छोटे व्यापारियों से कोई अतिरिक्त शुल्क नहीं वसूला जाएगा (Ai Image)

  • Published: 08 Aug 2026, 09:02 PM IST
  • Last Updated: 08 Aug 2026, 09:02 PM IST

UPI charges news: केंद्र सरकार ने शनिवार को यूनिफाइड पेमेंट्स इंटरफेस (UPI) लेनदेन पर शुल्क को लेकर आम उपभोक्ताओं के बीच बनी आशंकाओं को दूर करते हुए स्पष्ट किया कि यूजर्स और छोटे व्यापारियों को किसी भी तरह के लेनदेन पर अतिरिक्त शुल्क नहीं देना होगा। वित्त मंत्रालय ने यह भी कहा कि व्यापारियों के लिए भी अधिकांश लेनदेन मुफ्त ही बने रहेंगे।

सीमित लेनदेन पर ही लगेगा नाममात्र का MDR
हालांकि मंत्रालय ने यह भी बताया कि जब भी शुल्क लागू किया जाएगा, तो व्यापारियों पर एक नाममात्र का मर्चेंट डिस्काउंट रेट (MDR) लागू होगा। गौरतलब है कि पेमेंट एंड सेटलमेंट सिस्टम्स एक्ट, 2007 में संशोधन का बिल 6 अगस्त को लोकसभा में पारित किया गया था।

वित्त मंत्रालय के बयान के अनुसार, उपभोक्ताओं से भुगतान करते समय किसी भी तरह का लेनदेन शुल्क नहीं वसूला जाएगा और सभी व्यक्ति-से-व्यक्ति (पर्सन-टू-पर्सन) लेनदेन पूरी तरह मुफ्त ही बने रहेंगे। बयान में यह भी बताया गया कि नाममात्र का MDR "केवल एक सीमित संख्या में व्यापारी लेनदेन पर ही लागू किया जाएगा", जो एक निश्चित सीमा से ऊपर होंगे। मंत्रालय ने यह भी स्पष्ट किया कि यह दर डेबिट या क्रेडिट कार्ड पर लगने वाले MDR से "काफी कम" होगी।

व्यापारियों के लिए भी अधिकांश लेनदेन रहेंगे मुफ्त: वित्त मंत्रालय
वित्त मंत्रालय ने आगे बताया कि "UPI पर व्यापारियों के लिए भी अधिकांश लेनदेन मुफ्त ही बने रहेंगे।" मंत्रालय ने यह भी जोड़ा कि "अगर MDR लागू किया भी जाता है, तो यह केवल सीमा-आधारित होगा, न कि सभी लेनदेन पर एक समान रूप से लगाया जाएगा।"

मंत्रालय के मुताबिक, एक बार जब टैक्सेशन एंड अदर लॉज (अमेंडमेंट) बिल, 2026 को संसद से मंजूरी मिल जाएगी, तो नेशनल पेमेंट्स कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया (NPCI) की अध्यक्षता वाली "यूपीआई एंड सर्विसेज स्टीयरिंग कमेटी" यह तय करेगी कि MDR लगाया जाए या नहीं, और अगर लगाया जाए तो कितना। बता दें कि टैक्सेशन एंड अदर लॉज (अमेंडमेंट) बिल, 2026 में पेमेंट एंड सेटलमेंट सिस्टम्स एक्ट, 2007 की धारा 10A में संशोधन का प्रस्ताव है।

आखिर क्यों लाया गया यह संशोधन?
वित्त मंत्रालय ने इस संशोधन को लाने के पीछे की वजह भी विस्तार से बताई। मंत्रालय के अनुसार, यह प्रावधान UPI की "दीर्घकालिक स्थिरता, तकनीकी उन्नति और उभरते खतरों के खिलाफ मजबूती सुनिश्चित करने" के उद्देश्य से लाया गया है। मंत्रालय ने कहा कि लेनदेन की संख्या में भारी बढ़ोतरी के चलते इस सिस्टम को साइबर सुरक्षा, धोखाधड़ी रोकथाम और इंफ्रास्ट्रक्चर के मामले में "लगातार और महत्वपूर्ण अपग्रेड" की जरूरत है।

इसके अलावा मंत्रालय ने यह भी तर्क दिया कि यह संशोधन "अधिक कंपनियों को अपने परिचालन का विस्तार करने के लिए प्रोत्साहित कर प्रतिस्पर्धा बढ़ाने के लिए आवश्यक है", जिसके लिए एक "स्वयं-स्थायी राजस्व मॉडल" जरूरी है। मंत्रालय ने कहा कि इसका उद्देश्य "केवल सब्सिडी पर निर्भरता" को कम करना है, क्योंकि उनके अनुसार यह मॉडल "अगली विकास लहर के लिए व्यावहारिक नहीं है।"

मंत्रालय ने अंत में इस बात पर जोर दिया कि UPI को "मजबूत, समावेशी और भविष्य के लिए तैयार" बनाए रखने के लिए एक "संतुलित ढांचे" की आवश्यकता है।