UPI से NavIC तक... 5 'स्वदेशी' टेक इनोवेशन जिन्होंने बदली भारत की तस्वीर

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आज यानी 15 अगस्त 2026 को देश 80वां स्वतंत्रता दिवस मना रहा है. आजादी का मतलब सिर्फ सीमाओं की सुरक्षा नहीं, बल्कि तकनीक के मामले में आत्मनिर्भर होना भी है. पिछले कुछ वर्षों में भारत ने ऐसी कई डिजिटल तकनीकें तैयार की हैं, जिन्होंने आम लोगों की जिंदगी आसान बना दी है. अब पेमेंट के लिए कैश रखने, जरूरी कागज साथ लेकर चलने या टोल पर लंबी लाइन में खड़े होने की जरूरत काफी कम हो गई है. आइए जानते हैं ऐसी 5 भारतीय टेक्नोलॉजी के बारे में, जिन्होंने लोगों को डिजिटल आजादी दी.
1. UPI: कैश रखने की झंझट से आजादी
पहले छोटी से छोटी खरीदारी के लिए भी जेब में कैश रखना पड़ता था. छुट्टे पैसे की चिंता अलग होती थी. UPI ने पेमेंट का तरीका ही बदल दिया. अब चाय की दुकान से लेकर बड़े मॉल तक, सिर्फ क्यूआर कोड स्कैन करके कुछ ही सेकंड में पैसे भेजे जा सकते हैं. इससे लोगों के लिए रोजमर्रा की खरीदारी काफी आसान हो गई है.
2. FASTag: टोल की लंबी लाइन से आजादी
टोल प्लाजा पर कैश देने के लिए लंबी लाइन में लगना पड़ता था. कई बार छुट्टे पैसे की समस्या भी होती थी. FASTag ने इस परेशानी को काफी कम कर दिया. अब वाहन टोल प्लाजा से गुजरते समय बिना कैश दिए टोल का भुगतान कर सकते हैं और रकम डिजिटल तरीके से कट जाती है. इससे सफर के दौरान समय और ईंधन बचाने में मदद मिली है.
3. DigiLocker: जरूरी कागज साथ रखने की जरूरत कम
ड्राइविंग लाइसेंस, आरसी, आधार या मार्कशीट जैसे दस्तावेज संभालकर रखना हमेशा आसान नहीं होता. DigiLocker ने इन जरूरी दस्तावेजों को डिजिटल तरीके से रखने की सुविधा दी. अब जरूरत पड़ने पर मोबाइल से ही डिजिटल दस्तावेज दिखाए जा सकते हैं. इससे कागज खोने या हर जगह दस्तावेजों की फाइल लेकर घूमने की परेशानी कम हुई है. यह रेलवे स्टेशन से लेकर एयरपोर्ट तक, सभी जगह मान्य होता है.
4. ONDC: ऑनलाइन खरीदारी में नया विकल्प
ONDC यानी ओपन नेटवर्क फॉर डिजिटल कॉमर्स ने ऑनलाइन खरीदारी के लिए एक अलग तरह का नेटवर्क तैयार किया है. इसका मकसद छोटे दुकानदारों और स्थानीय कारोबारियों को डिजिटल कॉमर्स से जोड़ना है. इसके जरिए किराना दुकानों और स्थानीय रेस्टोरेंट जैसे कारोबार भी ऑनलाइन ग्राहकों तक पहुंच सकते हैं. इससे छोटे कारोबारियों को डिजिटल बाजार में जगह बनाने का मौका मिलता है.
5. NavIC: नेविगेशन के लिए भारत का अपना सिस्टम
रास्ता खोजने और लोकेशन जानने के लिए NavIC भारत का अपना सैटेलाइट नेविगेशन सिस्टम है. इसे भारतीय क्षेत्र और आसपास के इलाकों को ध्यान में रखकर विकसित किया गया है. इसका इस्तेमाल लोकेशन और नेविगेशन से जुड़ी सेवाओं में किया जा सकता है. भारतीय स्मार्टफोन में भी NavIC का सपोर्ट तेजी से देखने को मिल रहा है.
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विशाल मैथिल
भोपाल के रहने वाले हैं. कम्प्यूटर साइंस में ग्रेजुएशन और मीडिया रिसर्च में पोस्ट ग्रेजुएशन करने के बाद डिजिटल मीडिया में कदम रखा. दैनिक भास्कर से शुरुआत हुई. इसके बाद टाइम्स नाउ नवभारत और अमर उजाला जैसे संस्थान में टेक जर्नलिस्ट के दौर पर करने के बाद TV9 भारतवर्ष से जुड़े हैं. सोशल मीडिया कैंपेन को लीड करने और हिंदी मैग्जीन में भी काम करने का मौका मिला. फिलहाल टेक्नोलॉजी, सोशल मीडिया, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, साइबर सिक्योरिटी और स्मार्टफोन की खबरें आप तक आसान भाषा में पहुंचाने का काम कर रहे हैं. गैजेट्स कंपेरिजन, गैजेट्स रिव्यूज और मोबाइल रिचार्ज जैसे टॉपिक्स पर भी अच्छी पकड़ रखते हैं. रिसर्च, एक्सप्लेनर, डाटा स्टोरी और इंफोग्राफिक्स के साथ जटिल खबरों को आसानी से कहने और टेक जगत की छोटी-बड़ी अपडेट आप तक पहुंचाने का हुनर रखते हैं. गैजेट्स के अलावा किताबों और म्यूजिक में भी खूब मन लगता है.
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