US Election: चीन ने हैक किया था 2020 का अमेरिकी चुनाव? 2.78 लाख फर्जी वोटरों ने डाले वोट! कैसे बाहर आई बात?
Published: Friday, July 17, 2026, 11:04 [IST]
US Election Fraud: अगर आप अमेरिका राजनीति में जरा सी भी दिलचस्पी रखते हैं तो आपको अमेरिका का 2020 का चुनाव याद होगा ही। जिसमें जो बाइडन ने डोनाल्ड ट्रंप को पटखनी दी थी और फिर ट्रंप की व्हाइट हाउस से ऐसी विदाई हुई थी जिसे कोई भूल नहीं सकता। इस विदाई में व्हाइट हाउस में जमकर तोड़फोड़ और अराजकता हुई थी। ये चुनाव 6 साल बाद एक बार फिर विवादों में आ गया है। कारण है इस चुनाव में गड़बड़ी का आरोप। ये आरोप अमेरिका के इलेक्शन कमीशन पर नहीं बल्कि चीन पर लगे हैं। क्या है पूरा मामला और क्या है ट्रंप का दावा जानेंगे डिटेल में।
हैक हो गया था अमेरिका का चुनाव?
अमेरिकी राष्ट्रपत डोनाल्ड ट्रंप ने 2020 के राष्ट्रपति चुनावों को लेकर फिर बड़ा दावा किया है। व्हाइट हाउस से एक प्राइम-टाइम टीवी एड्रेस में ट्रंप ने कहा कि देश का इलेक्शन सिसटम हैकिंग और विदेशी दखलअंदाजी के लिए खुला हुआ है। उनके मुताबिक, हर अमेरकी को यह जानने का हक है कि उसका वोट बिल्कुल सही गिना जाए और सिस्टम पूरी तरह सिक्योर हो ताकि धोखाधड़ी की कोई गुंजाइश न बचे।
22 करोड़ वोटर्स का डेटा हुआ लीक?
ट्रंप ने दावा किया कि चीन ने चोरी-छिपे 220 मिलयन (22 करोड़) अमेरिकी वोटर्स की फाइलों को अपने कब्जे में ले लिया है। बकौल ट्रंप, यह अब तक का सबसे बड़ा इलेक्शन डेटा लीक है, जिसकी शुरुआत 2020 की चुनावी तैयारियों के दौरान हुई थी। इस डेटा में लोगों के नाम, पते, फोन नंबर, पोलिटिकल पार्टी की पसंद और वो सारी जरूरी डिटेल्स शामिल हैं जो वोट रजिस्टर करने या किसी गलत एक्टिविटी को अंजाम देने के लिए जरूरी हैं। ट्रंप ने इसे एक बड़ा इलेक्शन सिक्योरिटी नाइटमेयर बताया। उन्होंने कहा कि इंटेलिजेंस रिपोर्ट्स के मुताबिक, चीन ने इस काम के लिए एक स्पेशल डेटा एक्सप्लोइटेशन यूनिट भी तैयर की थी।
FBI को सौंपी जांच
इस मामले को लेकर ट्रंप ने डायरेक्टर ऑफ नेशनल इंटेलिजेंस (DNI) और FBI को पूरी गहराई से जांच करने के आदेश दिए हैं। ट्रंप प्रशासन जल्द ही कुछ सीक्रेट इंटेलिजेंस फाइलों को डीक्लासिफाई करने वाला है। उनके मुताबिक, ये फाइलें अमेरिकी इलेक्शन सिस्टम की कमजोरियों को सबके सामने लाकर रख देंगी, जिससे व्यवस्था में सुधार की जरूरत साफ दिेखेगी।
2.78 लाख गैर-नागरिकों ने डाला था वोट?
इलेक्शन सिस्टम पर सवाल उठाते हुए ट्रंप ने डिपार्टमेंट ऑफ होमलैंड सिक्योरिटी (DHS) की एक रिपोर्ट का हवाला दिया। उन्होंने बताया कि सरकारी रिकॉर्ड्स के रिव्यू के अनुसार, लगभग 2,78,000 ऐसे लोग जो अमेरिका के नागरिक नहीं हैं, वे भी फेडरल इलेक्शन में वोट डालने के लिए रजिस्टर्ड हैं। यानी की ऐसे लोगों ने उस चुनाव में वोट डाला हो सकता है जो अमेरिका के है हीं नहीं। ट्रंप ने आरोप लगाते हुए कहा कि 'डेमोक्रेट्स के लिए मजबूत माने जाने वाले राज्यों ने अपनी वोटर लिस्ट शेयर करने से मना कर दिया, इसलिए असली आंकड़ा इससे भी कहीं ज्यादा बड़ा हो सकता है।' उन्होंने साफ कहा कि काउंटिंग मशीनें और पूरा सिस्टम पूरी तरह हैकिंग और करप्शन की चपेट में है।
पार्टीबाजी छोड़ो, देश के लिए साथ आओ- ट्रंप
इतने गंभीर आरोपों के बीच ट्रंप ने देश को एकजुट होने की अपील भी की। उन्होंने कहा- 'चाहे आप रिपब्लिकन हों, डेमोक्रेट हों या इंडिपेंडेंट, हम सब इस बात पर सहमत होने चाहिए कि हमें दुनिया का सबसे सुरक्षित और ईमानदार इलेक्शन सिस्टम मिले। यह कोई पार्टी का मुद्दा नहीं है, यह हमें बांटने के बजाय आपस में जोड़ने का जरिया बनना चाहिए।'
दावों के पीछे का सच: अदालतों में क्या हुआ?
यह पहली बार नहीं है जब ट्रंप ने 2020 के चुनावों में चीन के दखल की बात की है। इससे पहले नेशनल इंटेलिजेंस ऑफिसर फॉर साइबर की कुछ फाइलों में भी यह बात सामने आई थी कि चीनी इंटेलिजेंस ने पब्लिक ओपिनियन को समझने के लिए कुछ अमेरिकी राज्यों के वोटर रजिस्ट्रेशन डेटा का एनालिसिस किया था। हालांकि, हकीकत यह भी है कि ट्रंप और उनके करीबियों द्वारा चुनाव में धांधली को लेकर जो 60 से अधिक मुकदमे कोर्ट में दायर किए गए थे, उनमें से किसी में भी ऐसा कोई सबूत नहीं मिल पाया जिससे 2020 के चुनाव नतीजे बदल सकें।
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