US Iran War: ईरान में गिरा अमेरिकी F-15E, 50 घंटे चला रेस्क्यू ऑपरेशन; ‘ब्रावो’ की कहानी ने मचाई हलचल | iran-us-war-american-f15e-rescue-mission-bravo-50-hours
वॉशिंगटन: US Air Force officer Bravo Story: अमेरिका और ईरान के बीच जारी सैन्य संघर्ष के दौरान अमेरिकी वायुसेना के एक अधिकारी की कहानी सामने आई है, जिसने इस अभियान की मुश्किलों और अमेरिकी सेना के बड़े बचाव प्रयास की तस्वीर पेश की है। अमेरिकी वायुसेना के वेपन्स सिस्टम ऑफिसर को सुरक्षा कारणों से केवल ‘ब्रावो’ के नाम से पहचाना गया है। उन्होंने सीबीएस न्यूज के कार्यक्रम ‘60 मिनट्स’ में पहली बार सार्वजनिक रूप से उस घटना के बारे में बताया, जिसमें ईरान के मिसाइल हमले के बाद उन्हें अपने एफ-15ई स्ट्राइक ईगल विमान से बाहर निकलना पड़ा था।
मिसाइल हमले के बाद विमान से निकलना पड़ा
घटना दो अप्रैल की बताई गई है। अमेरिकी एफ-15ई स्ट्राइक ईगल को इसाफहान के आसपास ईरानी मिसाइल से निशाना बनाए जाने के बाद विमान में मौजूद पायलट ‘अल्फा’ और वेपन्स सिस्टम ऑफिसर ‘ब्रावो’ को विमान छोड़ना पड़ा। ब्रावो के मुताबिक, विमान से बाहर निकलने के बाद उन्हें पैराशूट से जुड़ी तकनीकी समस्या का सामना करना पड़ा। इसके चलते वह बेहद तेज गति से नीचे आए और गंभीर रूप से घायल हुए। उन्होंने ‘60 मिनट्स’ को बताया कि उस समय सबसे भयावह बात यह थी कि ऊपर देखने पर उन्हें अपना पैराशूट दिखाई नहीं दे रहा था। उन्होंने कहा कि उस क्षण उन्होंने मदद के लिए ईश्वर से प्रार्थना की और बाद में सुरक्षित बच निकलना उन्हें किसी चमत्कार से कम नहीं लगा।
चोटों के बावजूद खुद को संभाला
घटना के बाद ब्रावो की स्थिति बेहद चुनौतीपूर्ण थी। उन्हें गंभीर चोटें आई थीं और वह ईरान के ऐसे इलाके में थे जहां उनके लिए सुरक्षा का खतरा बना हुआ था। इसके बावजूद उन्होंने अपनी स्थिति को संभालने की कोशिश की और सुरक्षित स्थान तक पहुंचने के लिए आगे बढ़े। उन्होंने करीब सात हजार फीट ऊंची और कठिन रिजलाइन तक पहुंचने का प्रयास किया। इसके बाद उन्होंने लगभग दो दिन तक खुद को छिपाकर रखा। इस दौरान अमेरिकी सेना की ओर से उन्हें खोजने और सुरक्षित निकालने के लिए बड़े स्तर पर अभियान चलाया जा रहा था।
रक्षा मंत्री ने दिया था स्पष्ट आदेश
अमेरिकी रक्षा मंत्री पीट हेगसेथ को जब इस घटना की जानकारी मिली तो उन्होंने बचाव अभियान को लेकर स्पष्ट निर्देश दिए। रिपोर्ट के अनुसार उनका संदेश था कि अधिकारी जीवित हों या नहीं, अमेरिकी सेना उन्हें वापस लाने की पूरी कोशिश करेगी। इसके बाद अमेरिकी सेंट्रल कमांड की निगरानी में एक व्यापक खोज एवं बचाव अभियान शुरू हुआ। सेंट्रल कमांड के कमांडर एडमिरल ब्रैड कूपर के अनुसार, इस अभियान में ईरानी क्षेत्र के भीतर कई अमेरिकी सैनिकों को उतारा गया। उनके मुताबिक, करीब 46 वर्षों में पहली बार इतनी बड़ी संख्या में अमेरिकी सैनिकों को इस तरह के अभियान के लिए ईरान की धरती पर भेजा गया।
ईरानी सैनिकों से कुछ ही दूरी पर था ठिकाना
ज्वाइंट चीफ्स ऑफ स्टाफ के अध्यक्ष जनरल डैन केन ने बताया कि ब्रावो जिस स्थान पर छिपे थे, वहां ईरानी सैनिकों की मौजूदगी लगातार करीब आती जा रही थी। रिपोर्ट में दावा किया गया कि ईरानी सैनिक उनके ठिकाने से कुछ सौ मीटर की दूरी तक पहुंच गए थे। ऐसे हालात में बचाव अभियान को बेहद सावधानी से आगे बढ़ाना पड़ा। रिपोर्ट के मुताबिक, अमेरिकी खुफिया क्षमताओं, रणनीतिक तौर पर तैयार की गई भ्रामक गतिविधियों और ईरानी रिवोल्यूशनरी गार्ड्स कॉर्प्स यानी आईआरजीसी से जुड़े ठिकानों पर किए गए अमेरिकी हमलों ने अभियान को आगे बढ़ाने में भूमिका निभाई।
करीब 50 घंटे बाद हुई सुरक्षित वापसी
काफी प्रयासों के बाद अमेरिकी टीम का ब्रावो से संपर्क स्थापित हुआ। करीब 50 घंटे तक चले अभियान के बाद ईस्टर रविवार की सुबह उन्हें सुरक्षित बाहर निकाल लिया गया। बचाव दल के पहुंचने के बाद ब्रावो की प्रतिक्रिया बेहद संक्षिप्त थी। रिपोर्ट के अनुसार उन्होंने कहा, “चलो, अब चलते हैं।” इस पूरे अभियान को अमेरिकी सैन्य अधिकारियों ने बेहद जटिल खोज एवं बचाव मिशन के तौर पर पेश किया।
ट्रंप ने बताया साहसिक बचाव अभियान
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भी इस अभियान की सफलता की सराहना की। उन्होंने कहा कि अमेरिकी सेना ने इतिहास के सबसे साहसिक खोज और बचाव अभियानों में से एक को अंजाम देते हुए अपने अधिकारी को वापस लाया। वहीं ब्रावो ने इस पूरी घटना का श्रेय केवल अपनी व्यक्तिगत क्षमता को नहीं दिया। उन्होंने इसे टीमवर्क, प्रशिक्षण और साथियों के बीच भरोसे का परिणाम बताया। दूसरी ओर, ईरानी मीडिया ने इस घटनाक्रम के संदर्भ में अपने वायु रक्षा तंत्र की क्षमता को रेखांकित किया।
इस घटना ने अमेरिका-ईरान संघर्ष के दौरान सैन्य अभियानों की जटिलता और जोखिम को एक बार फिर सामने ला दिया है। एक ओर अमेरिकी पक्ष ने इसे अपने सैनिक को सुरक्षित वापस लाने की बड़ी सफलता बताया, तो दूसरी ओर ईरान ने अपनी रक्षा क्षमताओं को लेकर अलग संदेश देने की कोशिश की है। ‘ब्रावो’ की आपबीती अब इस संघर्ष के सबसे चर्चित सैन्य घटनाक्रमों में शामिल हो गई है।