US Report: भारत के पास कितने परमाणु बम हैं? अमेरिकी थिंक टैंक ने बताया आंकड़ा

भारत के परमाणु हथियारों के भंडार को लेकर एक नई रिपोर्ट सामने आई है. फेडरेशन ऑफ अमेरिकन साइंटिस्ट्स (FAS) के आकलन के अनुसार, भारत के पास करीब 190 परमाणु वॉरहेड हैं. इनमें से 160 से अधिक वॉरहेड संभावित रूप से मौजूदा ऑपरेशनल डिलीवरी सिस्टम से जुड़े हैं, जबकि बाकी वॉरहेड नए विकसित किए जा रहे मिसाइल सिस्टम के लिए रखे जाने का अनुमान है.

रिपोर्ट के मुताबिक भारत के परमाणु हथियारों की संख्या पिछले कुछ वर्षों में धीरे-धीरे बढ़ी है. FAS का अनुमान है कि भारत के पास मौजूद सैन्य उपयोग योग्य प्लूटोनियम की मात्रा इतनी हो सकती है कि भविष्य में देश का परमाणु शस्त्रागार 225 वॉरहेड तक पहुंच सके. हालांकि, इसका मतलब यह नहीं है कि इतने हथियार अभी तैयार या तैनात हैं. यह अनुमान उपलब्ध परमाणु सामग्री और उसके संभावित उपयोग पर आधारित है.

पाकिस्तान के मुकाबले भारत का परमाणु भंडार

परमाणु हथियारों के अनुमान को लेकर विभिन्न अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं के आंकड़ों में कुछ अंतर हो सकता है. SIPRI के 2026 के आकलन के अनुसार, जनवरी 2026 में भारत के पास करीब 190 परमाणु वॉरहेड, जबकि पाकिस्तान के पास लगभग 170 वॉरहेड थे. SIPRI ने यह भी कहा कि भारत ने अपने परमाणु शस्त्रागार का विस्तार जारी रखा है और नए प्रकार की परमाणु डिलीवरी प्रणालियों को विकसित करने पर काम कर रहा है.

हालांकि, परमाणु हथियारों की वास्तविक संख्या सार्वजनिक रूप से उपलब्ध नहीं होती. इसलिए FAS और SIPRI जैसी संस्थाओं के आंकड़े अनुमान हैं, जिन्हें सार्वजनिक जानकारी, उपग्रह तस्वीरों, परमाणु सामग्री के उत्पादन और हथियार प्रणालियों के विश्लेषण के आधार पर तैयार किया जाता है.

नए मिसाइल सिस्टम पर जोर

रिपोर्टों के अनुसार भारत अपनी परमाणु क्षमता को आधुनिक बनाने पर भी लगातार काम कर रहा है. इसमें जमीन, समुद्र और हवा से परमाणु हथियार पहुंचाने की क्षमता को मजबूत करना शामिल है. भारत की परमाणु नीति में लंबी दूरी की मिसाइलों और समुद्र आधारित प्रणालियों का महत्व बढ़ा है. SIPRI के अनुसार, भारत का आधुनिकीकरण कार्यक्रम विशेष रूप से ऐसी लंबी दूरी की प्रणालियों पर केंद्रित हो रहा है, जो चीन तक लक्ष्यों को साधने में सक्षम हों.

भारत ने अग्नि श्रृंखला की मिसाइलों के साथ-साथ समुद्र से परमाणु हथियार ले जाने में सक्षम प्रणालियों को भी विकसित किया है. अग्नि-V जैसे सिस्टम भारत की लंबी दूरी की रणनीतिक क्षमता का महत्वपूर्ण हिस्सा हैं. FAS के आकलन में भारत के अधिकांश परमाणु वॉरहेड सामान्य परिस्थितियों में मिसाइलों से जुड़े हुए नहीं, बल्कि केंद्रीय भंडारण में रखे जाने की बात कही गई है.

प्लूटोनियम उत्पादन से भविष्य की क्षमता बढ़ने का अनुमान

FAS और Bulletin of the Atomic Scientists के विश्लेषण में भारत के प्लूटोनियम उत्पादन पर भी ध्यान दिया गया है. रिपोर्ट के अनुसार, भारत के पास भविष्य में परमाणु हथियारों की संख्या बढ़ाने की क्षमता हो सकती है. प्रोटोटाइप फास्ट ब्रीडर रिएक्टर (PFBR) से भविष्य में प्लूटोनियम उपलब्धता बढ़ने की संभावना भी इस आकलन का हिस्सा है. हालांकि, परमाणु सामग्री की उपलब्धता और तैयार परमाणु हथियारों की संख्या को एक समान नहीं माना जा सकता.

भारत की परमाणु नीति में क्या बदलाव?

भारत लंबे समय से 'नो फर्स्ट यूज' (NFU) नीति की बात करता रहा है. इसका अर्थ है कि भारत परमाणु हथियारों का पहले इस्तेमाल न करने की नीति रखता है, हालांकि परमाणु हथियारों और उनकी रणनीतिक क्षमता को देश की सुरक्षा और प्रतिरोधक क्षमता का महत्वपूर्ण हिस्सा माना जाता है. FAS के नए आकलन में भी भारत की इस नीति का उल्लेख किया गया है.

कुल मिलाकर, FAS और SIPRI के आकलन भारत के परमाणु शस्त्रागार के धीरे-धीरे विस्तार और उसके रणनीतिक आधुनिकीकरण की ओर संकेत करते हैं. हालांकि, वास्तविक परमाणु हथियारों की संख्या और उनकी तैनाती से जुड़ी अधिकांश जानकारी गोपनीय होने के कारण सार्वजनिक आंकड़ों को अनुमान के तौर पर ही देखा जाना चाहिए.