US Work Culture: अमेरिका में 9 से 5 का मतलब क्या सच में सिर्फ 9 से 5 है? भारतीय महिला ने बताया सच
India vs US Work Culture: अमेरिका में 9 से 5 का मतलब क्या वाकई सिर्फ 9 से 5 है? भारतीय महिला ने US ऑफिस कल्चर का अनुभव सोशल मीडिया पर शेयर किया, जिसने लोगों का ध्यान खींच लिया। जानें क्या कहा?
Viral Video 9 to 5 Work Culture: अमेरिका में नौकरी करने वाली एक भारतीय महिला ने वहां के वर्क कल्चर का ऐसा पहलू शेयर किया है, जिसने सोशल मीडिया पर बहस छेड़ दी है। उनका कहना है कि अमेरिका में तय काम के घंटे खत्म होते ही कर्मचारी ऑफिस छोड़ने में ज्यादा सहज नजर आते हैं। उनके मुताबिक, शाम 5 बजे की छुट्टी का मतलब वास्तव में 5 बजे ही काम खत्म करना है, न कि कुछ और देर तक डेस्क पर बैठे रहना। जानिए क्या बताया?
‘5 बजे के बाद ऑफिस में रुकना जरूरी नहीं’
इंस्टाग्राम पर निर्मला नाम से वीडियो शेयर करने वाली महिला ने अमेरिका और भारत के वर्किंग कल्चर की तुलना की। उन्होंने बताया कि भारत में 9 से 5 की शिफ्ट होने के बावजूद कई जगह कर्मचारी तय समय के बाद भी काम करते रहते हैं। कई बार काम पूरा करने या ऑफिस की अपेक्षाओं के चलते लोग निर्धारित समय से देर तक रुक जाते हैं।
इसके उलट, उन्होंने अमेरिका में अपने अनुभव के आधार पर कहा कि वहां काम के समय और निजी जिंदगी के बीच सीमा ज्यादा स्पष्ट दिखाई देती है। उन्होंने बताया कि लोग छुट्टी के समय से कुछ मिनट पहले ही अपना काम समेटना शुरू कर देते हैं और 5 बजते ही ऑफिस से निकल जाते हैं।
उनका कहना था कि यही स्पष्ट अंतर उन्हें अमेरिकी कार्यस्थल संस्कृति की सबसे अच्छी बातों में से एक लगता है, क्योंकि इससे कर्मचारियों को काम के बाद अपने परिवार, दोस्तों और निजी कामों के लिए समय मिल पाता है। नीचे देखें वायरल वीडियो-
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सोशल मीडिया पर ‘वर्क-लाइफ बैलेंस’ की चर्चा
वीडियो सामने आने के बाद कई यूजर्स ने कर्मचारी के निजी समय और काम के बीच संतुलन को लेकर अपनी राय शेयर की। कुछ लोगों ने कहा कि अगर नौकरी के घंटे 9 से 5 तय हैं, तो उसी समय के भीतर काम को व्यवस्थित करना चाहिए। एक यूजर ने इसे ‘वर्क-लाइफ बैलेंस’ का जरूरी हिस्सा बताया।
हालांकि, निर्मला की बात को पूरे अमेरिका के हर ऑफिस पर लागू नियम के तौर पर नहीं देखा जाना चाहिए। अलग-अलग कंपनियों, उद्योगों और नौकरियों में काम के घंटे और ओवरटाइम की व्यवस्था अलग हो सकती है। फिर भी उनका अनुभव इस बात पर ध्यान खींचता है कि काम के तय घंटों और पर्सनल टाइम की स्पष्ट सीमा कर्मचारियों के लिए कितना इंपोर्टेंट है।
यही वजह है कि उनका वीडियो सिर्फ भारत-अमेरिका की तुलना नहीं, बल्कि आधुनिक वर्क-लाइफ बैलेंस और ऑफिस कल्चर पर चर्चा का विषय बन गया है।
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