Uttarakhand Elections 2027: पिथौरागढ़ की सभी 4 विधानसभा सीटों का पूरा सियासी गणित

Uttarakhand Assembly Elections 2027: उत्तराखंड में अगले साल विधानसभा चुनाव होने वाले हैं. सभी राजनीतिक दलों ने अभी से चुनावी तैयारियां शुरू कर दी हैं. ऐसे में हम आज देवभूमि उत्तराखंड के पूर्वी छोर पर भारत-चीन और नेपाल की अंतरराष्ट्रीय सीमाओं से सटा पिथौरागढ़ जिले की सभी चार विधानसभा सीटों के बारे में बताने जा रहे हैं. पितौरागढ़ सिर्फ 'छोटा कश्मीर' कहे जाने वाले शोभावान सोर घाटी के नैसर्गिक सौंदर्य, आदिकैलास और ओम पर्वत की आध्यात्मिक ऊर्जा, और मिलम और नामिक ग्लेशियरों की साहसिक पगडंडियों तक सीमित नहीं है.

बल्कि यह जनपद कुमाऊं मंडल और पूरे राज्य की भू-सामरिक के साथ कूटनीतिक राजनीति का सबसे संवेदनशील और दुर्गम शक्ति केंद्र भी माना जाता है. जहां नैनीताल पर्यटन का चेहरा और अल्मोड़ा सांस्कृतिक मिजाज का प्रतीक है, तो वहीं पिथौरागढ़ सामरिक संवेदनशीलता, सीमावर्ती व्यापार के इतिहास के रूप में जाना जाता है. जिले की चारों विधानसभा सीट- पिथौरागढ़, धारचूला, डीडीहाट और गंगोलीहाट की चुनावी रणभूमि के रूप में प्रदेश की सत्ता की दिशा तय करने में निर्णायक भूमिका निभाती हैं.

बता दें कि पिथौरागढ़ केवल सामरिक और प्राकृतिक सौंदर्य का गढ़ नहीं है, बल्कि सीमावर्ती क्षेत्रों का विकास, पलायन की मार झेलते पहाड़ के गांव और कस्तूरी मृग व जड़ी-बूटी आधारित आर्थिकी इसकी धुरी हैं. चंपावत और अल्मोड़ा से घिरे इस सीमांत जिले की सोर घाटी के शहरी विस्तार से लेकर धारचूला और व्यास घाटी के दूरस्थ जनजातीय गांवों (रंग समुदाय) तक, और बेड़ीनाग की चाय-बागान पट्टी से लेकर गंगोलीहाट के पाताल भुवनेश्वर व हाटकालिका धाम तक, पिथौरागढ़ का हर मतदाता और सीमावर्ती सामरिक समीकरण देहरादून और दिल्ली के गलियारों में गूंजता है.

भू-सामरिक और राजनीतिक ताना-बाना

पिथौरागढ़ उत्तराखंड का सीमांत और संवेदनशीलता जिला है. जो चीन (तिब्बत) और नेपाल से सटी सीमा के कारण सामरिक अवसंरचना- सड़कें, पुल, आईटीबीपी/सेना की चौकियां, यहां का मुख्य मुद्दा और राष्ट्रीय सुरक्षा का केंद्र है. पिथौरागढ़, धारचूला, डीडीहाट और गंगोलीहाट चारों सीटों का अपना अलग भौगोलिक और जातिगत और क्षेत्रीय समीकरण है. ये जिला सीमा व्यापार की संभावनाएं, होमस्टे व इको-टूरिज्म, आदि कैलास-मानसरोवर यात्रा मार्ग का विकास और हॉर्टिकल्चर का केंद्र है.

चुनावी मिजाज की बात करें तो यहां के मतदाता राष्ट्रीय सुरक्षा, सीमावर्ती विकास, सड़क-स्वास्थ्य जैसी बुनियादी सुविधाओं और स्थानीय नेतृत्व के बीच संतुलन बनाते हैं. सोर घाटी के खेतों से लेकर उच्च हिमालयी दर्रों तक, पिथौरागढ़ की राजनीतिक सिर्फ स्थानीय निकाय का चुनाव नहीं, बल्कि भारत की उत्तर-पूर्वी सीमा के प्रहरी का जनादेश है, जो हर बार यह तय करता है कि पर्वत की यह चेतना किस करवट बैठती है.

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पिथौरागढ़ न केवल भारत-तिब्बत और नेपाल की सीमाओं से सटा सामरिक और सांस्कृतिक केंद्र है, बल्कि धारचूला जैसी अंतरराष्ट्रीय सीमांत चौकियां और सोर घाटी का कृषि-शहरी विस्तार इसकी पहचान को मजबूती प्रदान करते हैं. कैलास-मानसरोवर व आदि कैलास मार्ग की आध्यात्मिक वादियों से लेकर व्यास व डारमा घाटी के दूरस्थ जनजातीय गांवों तक, और पिथौरागढ़ के मैदानी-पर्वतीय बाजारों से लेकर गंगोलीहाट व डीडीहाट के दुर्गम पहाड़ों तक, पिथौरागढ़ की जनता का हर राजनीतिक फैसला देहरादून की विधानसभा की राजनीति को गहराई से प्रभावित करता है.

ऐतिहासिक रूप से पिथौरागढ़ की राजनीति कुमाऊं मंडल और राज्य के बड़े राजनीतिक क्षत्रपों (जैसे प्रकाश पंत और कांग्रेस-भाजपा के स्थानीय चेहरे) की कर्मभूमि रही है. राज्य गठन के बाद से ही यहां भारतीय जनता पार्टी (BJP) और भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस (INC) के बीच सीधी और तीखी टक्कर देखने को मिली है. सीमावर्ती जनसांख्यिकी और पूर्व सैनिकों/सैन्य परिवारों के बहुल क्षेत्र होने के कारण यहां स्थानीय अस्मिता, सीमा सुरक्षा व विकास, और दूरदराज के सीमांत गांवों का विकास हमेशा से चुनावी नतीजों की दिशा तय करता आया है.

यहां के सियासी मैदान में मुख्य मुद्दे सीमावर्ती क्षेत्रों से पलायन, जंगली जानवरों/भालू-बंदरों से खेती को नुकसान, स्वास्थ्य सुविधाओं व अस्पतालों में डॉक्टरों की कमी, स्थानीय स्तर पर रोजगार व होमस्टे-पर्यटन के अवसर, और सामरिक सड़कों के विस्तार के बाद स्थानीय अर्थव्यवस्था को गति देने के इर्द-गिर्द घूमते हैं.

 2011 की जनगणना के अनुसार, पिथौरागढ़ जिले की कुल आबादी और साक्षरता दर

श्रेणी

कुल

पुरुष

महिला

जनसंख्या

483,439

239,306

244,133

साक्षरता दर

82.25%

92.75%

72.29%

यह आंकड़े 2011 की जनगणना के आधार पर हैं.

पिथौरागढ़ जिले की कुल धार्मिक आबादी

धर्मप्रतिशतजनसंख्या
हिन्दू98.28%4,75,105
मुस्लिम1.24%6,015
ईसाई0.29%1,401
सिख0.05%260
बौद्ध0.04%185
जैन0.00%13
अन्य धर्म0.01%30

2022 विधानसभा चुनाव में कैसा रहा पिथौरागढ़ की सभी सीटों का चुनाव परिणाम

विधानसभा सीटउम्मीदवार का नामराजनीतिक पार्टीकुल प्राप्त वोट
धारचूलाहरीश सिंह धामीINC27,007
धन सिंह धामीBJP25,889
नारायण रामAAP711
डीडीहाटविशन सिंह चुफालBJP20,594
किशन भंडारीIND17,368
प्रदीप सिंह पालINC10,695
पिथौरागढ़मयूख महरINC33,269
चन्द्रा पंतBJP27,215
नितिन मारकानाIND6,585
गंगोलीहाट SCफ़कीर रामBJP32,296
खजान चंद्रINC22,243
बबीता चंद्रAAP1,023

अब जानते हैं सभी सीटों के बारे में विस्तार से...

  1. धारचूला (सीट संख्या 42): भारत-नेपाल और तिब्बत सीमा से सटा यह उत्तराखंड का क्षेत्रफल में सबसे बड़ा विधानसभा क्षेत्र है. 2022 के चुनाव में कांग्रेस के हरीश सिंह धामी ने कड़े मुकाबले में बीजेपी प्रत्याशी को 1,118 वोटों से हराकर लगातार अपनी जीत बरकरार रखी.

2. डीडीहाट (सीट संख्या 43): यह सीट भाजपा के वरिष्ठ नेता विशन सिंह चुफाल का मजबूत गढ़ मानी जाती है, जहाँ से वे लगातार चुनाव जीतते आ रहे हैं. 2022 के चुनाव में यहाँ मुख्य मुकाबला भाजपा और निर्दलीय प्रत्याशी किशन भंडारी के बीच रहा, जिसमें विशन सिंह चुफाल विजयी रहे.

3. पिथौरागढ़ (सीट संख्या 44): यह जिले का मुख्यालय और राजनीतिक रूप से सबसे प्रमुख सामान्य विधानसभा क्षेत्र है. 2022 में कांग्रेस प्रत्याशी मयूख महर ने भाजपा की तत्कालीन विधायक चन्द्रा पंत को 6,054 मतों के अंतर से हराकर इस सीट पर वापसी की. 

4. गंगोलीहाट (सीट संख्या 45 - SC):यह अनुसूचित जाति (SC) के लिए आरक्षित सीट है, जो प्रसिद्ध महाकाली मंदिर और पाताल भुवनेश्वर गुफा के लिए भी जानी जाती है. 2022 के चुनाव में भाजपा के फ़कीर राम ताम्टा ने कांग्रेस के खजान चंद्र को 10,053 वोटों के बड़े अंतर से मात दी.

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