Video: सोनिया गांधी ने कार्यकर्ताओं को वंदे मातरम गाने से रोका? BJP के आरोप पर कांग्रेस ने बताया 'सच'
Published: Saturday, August 15, 2026, 13:48 [IST]
देश 80वां स्वतंत्रता दिवस मना रहा है और इसी बीच वंदे मातरम् को लेकर कांग्रेस और बीजेपी के बीच नया सियासी विवाद खड़ा हो गया है। कांग्रेस मुख्यालय में 15 अगस्त को तिरंगा फहराया गया और वंदे मातरम् का गायन भी हुआ। इसी कार्यक्रम को लेकर बीजेपी ने कांग्रेस नेता सोनिया गांधी पर सवाल उठाए। बीजेपी प्रवक्ता आरपी सिंह ने आरोप लगाया कि वंदे मातरम् गाए जाने के दौरान सोनिया गांधी नाराज हुईं और उन्होंने कार्यकर्ताओं से इसे रोकने को कहा।
वायरल हुए वीडियो में देखा जा सकता है कि वंदे मातरम गाए जाने के दौरान सोनिया गांधी अपने पीछे खड़े कार्यकर्ता को कुछ बोलती हैं। इसी वजह से सोशल मीडिया पर ये बातें होने लगी कि सोनिया गांधी ने वंदे मातरम् गाते वक्त कार्यकर्ता को रोका। हालांकि अब बीजेपी के आरोपों को कांग्रेस ने खारिज कर दिया है।
क्या सोनिया गांधी ने वंदे मातरम् रुकवाया?
बीजेपी प्रवक्ता आरपी सिंह ने सोशल मीडिया पोस्ट के जरिए सोनिया गांधी पर निशाना साधा। उनका दावा था कि कांग्रेस मुख्यालय में वंदे मातरम् चल रहा था, तभी सोनिया गांधी कथित तौर पर नाराज हुईं और कार्यकर्ताओं को इसे रोकने के लिए कहा।
आरपी सिंह ने सवाल उठाया, "अगर वंदे मातरम् देश का राष्ट्रीय गीत है, तो सोनिया गांधी को इसके गायन पर आपत्ति क्यों हुई? आखिर उन्हें वंदे मातरम् से इतनी परेशानी क्यों है?"
हालांकि इस दावे की पुष्टि करने वाला कोई स्वतंत्र आधिकारिक सबूत सामने नहीं रखा गया है। कांग्रेस नेताओं ने भी कार्यक्रम में किसी तरह के व्यवधान की बात से इनकार किया है।
कांग्रेस बोली- वंदे मातरम् को लेकर कोई विवाद नहीं
कांग्रेस नेता जयराम रमेश ने बीजेपी के आरोप को खारिज करते हुए कहा कि पार्टी के कार्यक्रमों में वंदे मातरम् को लेकर कोई विवाद नहीं है। उन्होंने इसकी ऐतिहासिक पृष्ठभूमि भी सामने रखी।
जयराम रमेश ने कहा, "1937 में कांग्रेस कार्यसमिति ने वंदे मातरम् को लेकर चर्चा की थी। महात्मा गांधी, नेताजी सुभाष चंद्र बोस, मौलाना अबुल कलाम आजाद, जवाहरलाल नेहरू और दूसरे बड़े नेता इस पूरी प्रक्रिया का हिस्सा थे। गुरुदेव रवींद्रनाथ टैगोर की सलाह के बाद शुरुआती दो अंतरों को कांग्रेस कार्यक्रमों में गाने का फैसला हुआ था।"
1937 की कांग्रेस कार्यसमिति के फैसले और टैगोर की भूमिका का यह ऐतिहासिक संदर्भ संसदीय रिकॉर्ड में भी दर्ज है।
पवन खेड़ा और अशोक गहलोत ने भी दी सफाई
कांग्रेस नेता पवन खेड़ा ने भी कहा कि कांग्रेस मुख्यालय में वंदे मातरम् के दौरान कोई रुकावट नहीं डाली गई। राजस्थान के पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने भी इस विवाद पर कांग्रेस का पक्ष दोहराया और कहा कि वंदे मातरम् को लेकर पार्टी की तरफ से कोई विवाद नहीं है। दरअसल, वंदे मातरम् के शुरुआती दो अंतरों को लेकर कांग्रेस का ऐतिहासिक रुख नया नहीं है। जयराम रमेश पहले भी संसद में बता चुके हैं कि 1937 में इस पर लंबी चर्चा हुई थी और रवींद्रनाथ टैगोर की सलाह का इसमें खास असर था।
असली विवाद सोनिया गांधी नहीं, इतिहास का है?
इस पूरे मामले में दो दावे आमने-सामने हैं। बीजेपी का आरोप सोनिया गांधी के कथित व्यवहार को लेकर है, जबकि कांग्रेस का जवाब वंदे मातरम् के ऐतिहासिक इस्तेमाल और 1937 के फैसले पर केंद्रित है। इसलिए फिलहाल इतना ही साफ है कि कांग्रेस मुख्यालय में वंदे मातरम् गाया गया और कांग्रेस नेताओं ने इसे रोकने के आरोप से इनकार किया है। सोनिया गांधी ने खुद इस आरोप पर क्या कहा, इसकी स्वतंत्र पुष्टि के लिए उनका प्रत्यक्ष बयान सामने आना बाकी है।